Monday, May 7, 2018

रायबरेली शिक्षा विभाग का नया कारनामा

सर्व शिक्षा अभियान के मीना मंच कार्यक्रम मे खेल की ट्रेनिंग लेने आई शिक्षिकाए ही बनाई गयी ट्रेंनर

रायबरेली। बेसिक शिक्षा विभाग आए दिन अपने नए नए कारनामों के लिए अखबार की खूब सुर्खियां बटोरता है। एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है रायबरेली के चक अहमदपुर नजूल प्राथमिक विद्यालय में जिले के छह ब्लॉक कि लगभग 4 दर्जन शिक्षक, शिक्षिकाएं एकत्र हुई। मामला था सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत मीना मंच के गठन के संबंध में उन शिक्षिकाओं को ट्रेनिंग देनी थी जो अपने विद्यालय में मीना मंच की गतिविधियों को मूर्तरुप देेेंगी। लेकिन हकीकत कुछ यह है कि जिन ट्रेनर को ट्रेनिंग देने के लिए कहा गया वह स्वयं ही ट्रेनिंग लेने आई थीं।
जैसा कि उन्होंने पहले दिन ही पत्रकारों के सवाल पर कैमरे पर स्वीकार किया। ट्रेनर के लिए चयनित चारों शिक्षकों ने बताया कि उनका तो चयन अभी किया गया है और इससे पहले उन्हें किसी प्रकार की कोई ट्रेनिंग नहीं दी गई। वह स्वयं ट्रेनिंग लेने वालों के मध्य बैठी थी। जिले के जिला समन्वयक अनिल त्रिपाठी उन्हें कुछ बता रहे थे। जब पत्रकारों ने शिक्षिकाओं से पूछा कि आपको आज क्या ट्रेनिंग दी गई तो कोई भी कुछ बताने की स्थिति में नहीं था। यहां तक उन शिक्षिकाओं को यह तक पता नहीं की यह ट्रेनिंग किस प्रकार की है आवासी ट्रेनिंग है अथवा दिवसीय इतना ही नहीं शिक्षिकाओं ने तो यहां तक कहा कि कल देर रात हम लोगों को इसकी जानकारी हुई है । किसी प्रकार का कोई लिखित आदेश हमारे पास नहीं है। खास बात यह है कि खंड शिक्षा अधिकारियों के पास भी किसी प्रकार का कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं है।
इस संबंध में जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय शूक्ला से दूरभाष द्वारा जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि मुझे जानकारी नहीं है की चक अहमदपुर में या किसी भी स्थान पर कोई ट्रेनिंग चल रही है।
वाह रे बेसिक शिक्षा विभाग जिस के मुखिया को ही ज्ञात नहीं की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार के होते हुए भी बेसिक शिक्षा विभाग में पढ़ रही बेटियों के साथ कितना घटिया मजाक किया जा रहा है। जिस ट्रेनिंग के माध्यम से शिक्षक शिक्षिकाएं उन्हें अपने जीवन में अच्छा बनने का व आने वाली समस्याओं से रूबरू करा कर चतुर्मुखी विकास के लिए प्रेरित करने की कोशिश करने का प्रयास कर रही है। उस ट्रेनिंग का ही इतना बुरा हाल है, कि पिछला वित्तीय वर्ष बीत जाने के बाद भी विभाग ने ट्रेनिंग नहीं कराया। वह तो भला हो सर्व शिक्षा अभियान के परियोजना निरीक्षण टीम का जो अप्रैल में रायबरेली मे परियोजनाओं की हकीकत जानने पहुंची उसे ज्ञात हुआ कि मीना मंच जैसी महत्वपूर्ण गतिविधि के संबंध में जो प्रशिक्षण कार्यक्रम सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है उस प्रशिक्षण को भी रायबरेली बेसिक शिक्षा विभाग ने नहीं कराया। इस पर चेतावनी देते हुए परियोजना टीम ने कहा कि यदि 20 मई से पहले आप जिला समन्वयक व लेखा अधिकारी से कहा कि इस प्रशिक्षण को पूरा नहीं किया तो कार्रवाई आप सब लोगों पर होगी। यह जल्दबाजी इसी बात की ही है कि बिना आदेश के ही समन्वयक नेें इतनी बड़ी गतिविधि को एक ऐसे विद्यालय में कराना आरंभ कर दिया जहां के विद्यालय संचालक को भी इसकी सूचना सुबह ही मौखिक ही मिली।
खास बात यह है कि जिस विद्यालय में 40 से 50 कुर्सी ही मात्र हैं वहां 200 लोगों का प्रशिक्षण कहां पर बिठाकर और कैसे करेंगे जिला समन्वयक यह अपने आप में सवालों के घेरे में है। कैमरे में कैद हुई तस्वीरों को अगर सही माने तो कुल संख्या 40 से 50 के आसपास ही प्रशिक्षण लेने वालों की थी। यह अलग बात है कि आंकड़ों के इस विभाग में यह संख्या 200 के पार होगी इस संबंध में जब लेखा अधिकारी धीरेन्द्र श्रीवास्तव से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम 31 मार्च से पूर्व समाप्त करना था किंतु किन कारणों से जिला समन्वयक ने इस प्रशिक्षण को पूर्ण नहीं किया इस संबंध में वही बेहतर बता पाएंगे। आलम तो यह है कि जब मीडिया कर्मी शाम को ४ बजे प्रशिक्षण स्थल पर पहुंचे तो प्रशिक्षण स्थल पूरी तरह से खाली नजर आया वहीं से लोगों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को फोन लगाया तो उन्होंने कहा कि मुझे प्रशिक्षण के संबंध में कोई जानकारी नहीं है मैं एक मीटिंग में बैठा हूं।

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